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जीवन मंत्र

कृष्ण हैं परम पुरुष  

Updated on 29 September, 2020, 6:00
जीव तथा भगवान की स्वाभाविक स्थिति के विषय में अनेक दार्शनिक ऊहापोह में रहते हैं। जो भगवान कृष्ण को परम पुरुष के रूप में जानता है, वह सारी वस्तुओं का ज्ञाता है। अपूर्ण ज्ञाता परम सत्य के विषय में केवल चिन्तन करता जाता है, जबकि पूर्ण ज्ञाता समय का अपव्यय... आगे पढ़े

दिव्यता की विविधता  

Updated on 28 September, 2020, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... आगे पढ़े

गुरु की स्वीकार्यता  

Updated on 27 September, 2020, 6:00
हर वक्त संसार को गुरु की दृष्टि से देखो। तब यह संसार मलिन नहीं बल्कि प्रेम, आनन्द, सहयोगिता, दया आदि गुणों से परिपूर्ण, अधिक उत्सवपूर्ण लगेगा। तुम्हें किसी के साथ संबंध बनाने में भय नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे पास आश्रय है। घर के अन्दर से तुम बाहर के वज्रपात, आंधी,... आगे पढ़े

 सतोगुण और तमोगुण का फर्क 

Updated on 26 September, 2020, 6:00
सतोगुण में ज्ञान के विकास से मनुष्य यह जान सकता है कि कौन क्या है, लेकिन तमोगुण तो इसके सर्वधा विपरीत होता है. जो भी तमोगुण के फेर में पड़ता है, वह पागल हो जाता है और पागल पुरुष यह नहीं समझ पाता कि कौन क्या है! वह प्रगति करने... आगे पढ़े

 शरीर, मन, बुद्धि एवं आत्मा देश में एकात्म भाव कोरोना संकट को पराजित करेगा? 

Updated on 25 September, 2020, 6:15
“विश्व समेत जब देश प्रदेश एवं आमजन संकट में हों। समाज में बाढ़, भूकंप, महामारी, बीमारी की स्थितियाँ हों, तब व्यक्ति का मूल दायित्व होता है कि वह सन्यासी बनकर गुफाओं में कँदराओं में जाकर जपतप न करे बल्कि समाज के भीतर रहकर अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति करे ?... आगे पढ़े

प्रयत्न में ऊब नहीं 

Updated on 25 September, 2020, 6:00
संसार में गति के जो नियम हैं, परमात्मा में गति के ठीक उनसे उलटे नियम काम आते हैं और यहीं बड़ी मुश्किल हो जाती है। संसार में ऊबना बाद में आता है, प्रयत्न में ऊब नहीं आती। इसलिए संसार में लोग गति करते चले जाते हैं। पर परमात्मा में प्रयत्न... आगे पढ़े

 ध्वनि का प्राणी शरीर पर प्रभाव  

Updated on 22 September, 2020, 6:00
यह जानकर खुश होगें की ध्वनि का प्रभाव प्रत्येक जीव के शरीर पर पड़ता है। वर्तमान औधोगिकी करण और तकनीकि से ध्वनि प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ रहा है। इस ध्वनि प्रदूषण के परिणाम देखते हुये नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. राबर्ट कॉक ने सन् 1925-26 में एक बात कही थी... आगे पढ़े

किन ग्रहों की वजह से आती है रिश्तों में खटास? संबंध सुधारने के उपाय भी जान लें

Updated on 21 September, 2020, 15:17
हर ग्रह का एक खास गुण होता है. उसी गुण से मिलता जुलता रिश्ता उस ग्रह से प्रभावित होता है. अगर रिश्ते से सम्बंधित ग्रह कमजोर हुआ तो रिश्ता बिगड़ जाता है. अगर कोई रिश्ता कमजोर हुआ तो सम्बंधित ग्रह भी कमजोर हो जाता है. अगर कोई ग्रह कुंडली में... आगे पढ़े

पाप कर्म का फल हानिकारक है 

Updated on 20 September, 2020, 6:00
कहहिं कबीर यह कलि है खोटी। जो रहे करवा सो निकरै टोटी।। एक छोटा सा पहाड़ी गांव था। ग्राम के सभी लोग शराब व मांस का सेवन करते थे। जो शराब नहीं पीता था, जो मांस नहीं खाता था उसे ग्राम सजा के रूप में ग्राम बाहर कर देते थे।... आगे पढ़े

अनमोल हैं कड़वे बोल 

Updated on 19 September, 2020, 6:00
किसी ने कहा है कि अंधेरे में माचिस तलाशता हुआ हाथ, अंधेरे में होते हुए भी अंधेरे में नहीं होता, इस तलाश को अपने भीतर निरंतर जीवित रखना कोई साधारण बात नहीं है, परंतु जो लोग सफर की हदों को पहचानते हैं, जिन्हें हर मंजिल के बाद किसी नए सफर... आगे पढ़े

हथेली का कौन-सा तिल शुभ और अशुभ, जानिए कैसे तिल बना सकता है आपकी तकदीर

Updated on 18 September, 2020, 12:56
व्यक्ति के हाथ में कई रेखाएं होती हैं। हथेली की रेखाओं से व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव का पता चलता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली की रेखाओं के अलावा शरीर के अलग-अलग अंगों पर बने तिलों का भी विशेष महत्व होता है। तिल से भी व्यक्ति के भाग्य, तरक्की... आगे पढ़े

प्रधानता आत्मा को 

Updated on 16 September, 2020, 6:00
मनुष्य सामान्यत: जो बाह्य में देखता, सुनता, समझता है वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता। किन्तु भ्रमवश उसी को यथार्थ ज्ञान मान लेता है। अवास्तविक ज्ञान को ही ज्ञान समझकर और उसके अनुसार अपने कार्य करने केकारण मनुष्य अपने मूल उद्देश्य सुख-शान्ति की दिशा में अग्रसर न होकर विपरीत दिशा में... आगे पढ़े

 कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 15 September, 2020, 6:00
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... आगे पढ़े

 जहाँ शांति है वही सुख 

Updated on 14 September, 2020, 6:00
यदि हमारे पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है 'शांति'। सबसे पहले तो हमें ये जान लेना... आगे पढ़े

 जीवन एक क्रिकेट मैच 

Updated on 13 September, 2020, 6:00
प्रांतिकारी संत तरुणसागरजी ने क्रिकेट की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन एक क्रिकेट है, धरती की विराट पिच पर समय बॉलिंग कर रहा है। शरीर बल्लेबाज है, परमात्मा के इस आयोजन पर अम्पायर धर्मराज हैं। बीमारियाँ फील्डिंग कर रही हैं, विकेटकीपर यमराज हैं, प्राण हमारा विकेट है, जीवन एक... आगे पढ़े

क्या हैं आध्यात्मिक होने का अर्थ 

Updated on 12 September, 2020, 6:00
यह प्रश्न किसी भी जिज्ञासु के मन में उठ सकता है कि हमें ठीक-ठीक ऐसा क्या करना चाहिए ताकि वह जो परम है, जो परमेश्वर है, वह मेरे जीवन में घटित हो सके? सदगुरु इसका उत्तर देते हैं कि अध्यात्म भीगी बिल्लियों के लिए नहीं है, क्या तुम समझ रहे... आगे पढ़े

ज्ञेय और ज्ञान का संबंध

Updated on 11 September, 2020, 6:15
दर्शन के क्षेत्र में ज्ञान और ज्ञेय की मीमांसा चिरकाल से होती रही है। आदर्शवादी और विज्ञानवादी दर्शन ज्ञेय की स्वतंत्र सत्ता स्वीकार नहीं करते। वे केवल ज्ञान की ही सत्ता को मान्य करते हैं। अनेकांत का मूल आधार यह है कि ज्ञान की भांति ज्ञेय की भी स्वतंत्र सत्ता... आगे पढ़े

निर्णय में बदलाव पर नजर

Updated on 6 September, 2020, 6:00
लोगों के व्यवहार व कार्यो से या तो तुम सहमत होते हो या असहमत। परंतु इतना सदैव याद रखो कि सब कुछ परिवर्तनशील है। इसीलिए किसी भी निर्णय पर अड़े मत रहो वरना तुम्हारी धारणाएं चट्टान की तरह ठोस हो जाती हैं और तुम्हें व औरों को दु:खी करती हैं।... आगे पढ़े

पशुवध निंदनीय-दंडनीय कर्म

Updated on 5 September, 2020, 6:45
सतोगुण में किये गये पुण्यकर्मो का फल शुद्ध होता है, अतएव वे मुनिगण, जो समस्त मोह से मुक्त हैं, सुखी रहते हैं। लेकिन रजोगुण में किये गये कर्म दुख का कारण बनते है। भौतिक सुख के लिए जो भी कार्य किया जाता है, उसका विफल होना निश्चित है। उदाहरणार्थ, यदि... आगे पढ़े

वाणी का हमेशा रखें ध्यान 

Updated on 3 September, 2020, 6:45
हमारी वाणी भी जीवन में अहम भाव रखती है और यह बिगड़ जाये तो जीवन कष्टकारी होने में देर नहीं लगती, इसलिए अपनी वाणी हमेशा अच्छी होनी चाहिये। अगर ऐसा नहीं होता तो हमें विपरीन हालातों का सामना करना पड़ता है। कई बार ग्रह दशा से भी वाणी खराब हो... आगे पढ़े

कर्त्तव्य को बनाएं सर्वोपरि लक्ष्य 

Updated on 30 August, 2020, 6:00
अध्यापक ने विद्यार्थियों से पूछा- ‘रामायण और महाभारत में क्या अंतर है?’ विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी समझ के अनुसार उत्तर दिए। अध्यापक को संतोष नहीं हुआ। एक विद्यार्थी ने अनुरोध किया- ‘आप ही बताइए’ अध्यापक बोला-रामायण और महाभारत में सबसे बड़ा अंतर है ‘हक-हकूक’ का। रामायण में राम ने अपना अधिकार... आगे पढ़े

बड़ी जीत का सपना पूरा करना है पूरा तो पहले छोटे लक्ष्य हासिल करें

Updated on 3 August, 2020, 6:30
बात उन दिनों की है, जब शिवाजी मुगलों के विरुद्ध छापामार युद्ध लड़ रहे थे। एक दिन वे छिपते-छिपाते एक वनवासी बुढ़िया की झोंपड़ी पर पहुंचे और उससे भोजन की प्रार्थना की। बुढ़िया ने प्रेमपूर्वक खिचड़ी बनाकर उन्हें परोस दी। शिवाजी को भूख बहुत जोरों से लगी थी, इसलिए जल्दी... आगे पढ़े

 सुख के स्वभाव में डूबो

Updated on 27 July, 2020, 6:15
लगता है, आदमी दुख का खोजी है। दुख को छोड़ता नहीं, दुख को पकड़ता है। दुख को बचाता है। दुख को संवारता है; तिजोरी में संभालकर रखता है।   दुख का बीज हाथ पड़ जाए, हीरे की तरह संभालता है। लाख दुख पाए, पर फेंकने की तैयारी नहीं दिखाता। जो लोग... आगे पढ़े

योगनिद्रा से दूर होंगे सभी तनाव  

Updated on 18 June, 2020, 6:15
आठ घंटे की नींद लेने के बाद जब उठते हैं तो आप खुद को थका हुआ और बोझिल महसूस करते हैं। जिसका सीधा सा मतलब है कि आप तनाव में हैं जो आप के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नींद पूरी करने के बावजूद यदि थकान महसूस हो तथा... आगे पढ़े

हर मनुष्य के जीवन हैं दुख

Updated on 9 June, 2020, 6:00
एक बार भगवान बुद्ध से किसी भिक्षु ने पूछा-भगवान! ईश्वर है या नहीं है? बुद्ध ने इसका सीधा उत्तर न देकर प्रश्नकर्ता भिक्षु से कहा-मनुष्य की समस्या ईश्वर के होने या न होने की नहीं है। मनुष्य की मुख्य समस्या है उसके जीवन में आने वाले दुखों की। भगवान बुद्ध... आगे पढ़े

 मृत्यु के उपरांत शरीर नष्ट हो जाता है 

Updated on 8 June, 2020, 6:00
अष्टावप्र गीता' में आचार्य अष्टावक्र कहते हैं कि मनुष्य शरीर मात्र शरीर नहीं है। वह चैतन्य आत्मा है। आत्मा ही इस शरीर की पोषक है। जैसे ही आत्मा इस शरीर से बाहर निकलती है, शरीर विकृत होने लगता है। बुद्धि, कर्म, भोग, अहंकार, लोभ, मोह शरीर और मन के धर्म... आगे पढ़े

धर्म का अर्थ

Updated on 31 May, 2020, 6:00
किसी संत के पास एक युवक आया और उसने उनसे धर्म ज्ञान देने की प्रार्थना की। संत ने कहा कि वह उनके साथ कुछ दिन रहे, फिर वे उसे धर्म का सार बताएंगे। युवक उनके आश्रम में रहने लगा। वह संत की हर बात मानता और उनकी सेवा करता। इस... आगे पढ़े

सदाचार की परीक्षा

Updated on 30 May, 2020, 6:00
राजा अंग सिंह के पुत्र प्रवीण सिंह गलत संगति में पड़कर अनुचित कार्य करने लगा। चारों तरफ से उसकी शिकायतें आने लगीं। इससे राजा अत्यंत चिंतित हो गए। प्रवीण सिंह अभी बालक ही था, इसलिए राजा चाहते थे कि उसका स्वभाव बदले और भविष्य में वह एक नेक राजा बन... आगे पढ़े

वैज्ञानिक बनने की चाह

Updated on 29 May, 2020, 6:00
किसी समय लंदन की एक बस्ती में एक अनाथ बालक रहता था। वह अखबार बेचकर किसी तरह अपना गुजारा करता था। कुछ समय बाद उसे एक जिल्दसाज की दुकान पर जिल्द चढ़ाने का काम मिल गया। उस बालक को पढ़ने का बहुत शौक था। वह पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाते समय... आगे पढ़े

प्रतिभा और ज्ञान 

Updated on 24 May, 2020, 6:00
एक संत को जंगल में एक नवजात शिशु मिला। वह उसे अपने घर जे आए। उन्होंने उसका नाम जीवक रखा। उन्होंने जीवक को अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्रदान की। जब वह बड़ा हुआ तो उसने संत से पूछा, 'गुरुजी, मेरे माता-पिता कौन हैं?' संत को जीवक के मुंह से यह सुनकर बड़ा... आगे पढ़े

अपना बालाघाट


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