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जीवन मंत्र

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम स्वंय हैं

Updated on 24 January, 2021, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... आगे पढ़े

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज 

Updated on 18 January, 2021, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ। जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... आगे पढ़े

उद्यम में है लक्ष्मी का वास 

Updated on 13 January, 2021, 6:45
काम का ढेर देखकर कभी घबराना नहीं। मनुष्य काम करने के लिए ही जन्मा है। वह नहीं चाहेगा तो भी उसे काम करना ही पड़ेगा। जो कर्तव्य-कर्म करने में उत्साही है, वही दूसरों के लिए उपयोगी होने का सुख भोग सकता है। उद्यम में लक्ष्मी का वास है और आलस्य... आगे पढ़े

प्रेम और दया से ही प्रसन्न होंगे ईश्वर

Updated on 10 January, 2021, 6:00
ईश्वर को खुश करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। मंत्र साधक लाखों बार मंत्र जप करते हैं, भक्ति मार्ग पर चलने वाले लोग मंदिर जाकर ईश्वर की पूजा करते हैं। धूप-दीप आरती से भगवान को प्रसन्न करने की भी कोशिश करते हैं। इतना करने के बाद भी... आगे पढ़े

मकर संक्रांति 14 को

Updated on 9 January, 2021, 14:09
इस दिन से उत्तरायण होता है सूर्य और इस पर्व पर किए गए दान से मिलता है कई गुना पुण्य     महाभारत के मुताबिक भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के लिए उत्तरायण काल को ही चुना था     सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं के दिन की शुरुआत हो जाती... आगे पढ़े

क्यों कहते हैं विष्णु भगवान को नारायण

Updated on 7 January, 2021, 6:00
भगवान विष्णु के हजारों नाम हैं। इनमें एक प्रमुख नाम है नारायण। फिल्मों, टीवी सीरियल या रामलीला में आपने देखा होगा कि नारद मुनि भगवान विष्णु को नारायण नाम से पुकारते हैं। इस नाम का धार्मिक रूप से बड़ा महत्व है। इस एक नाम में सृष्टि का संपूर्ण सार छिपा... आगे पढ़े

यक्ष-प्रश्न की युगीन व्याख्या 

Updated on 5 January, 2021, 6:00
महाभारत में एक कथा आती है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों को घूमते हुए प्यास लगी। नकुल पानी ढूँढते-ढूँढते जलाशय के पास पहुँचे। जैसे ही वे पानी पीने को उद्यत हुए, एक यक्ष ने उन्हें रोक दिया और कहा कि मेरे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद ही तुम पानी पी... आगे पढ़े

क्षमा भाव आत्मसात करें

Updated on 3 January, 2021, 7:00
बुद्धि का अर्थ है नीर-क्षीर विवेक करने वाली शक्ति और ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा पदार्थ को जान लेना। ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा भौतिक पदार्थ के अन्तर को जानना। आधुनिक शिक्षा में आत्मा के विषय में कोई ज्ञान नहीं दिया जाता, केवल भौतिक तत्वों तथा शारीरिक आवश्यकताओं... आगे पढ़े

मानव जीवन की गरिमा

Updated on 30 December, 2020, 6:00
नालंदा तक्षशिला जैसे अनेक विश्वविद्यालय इस देश में थे। देश की शिक्षा व्यवस्था की पूर्ति तो स्थानीय गुरुकुल ही कर लेते थे। उच्च स्तरीय एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध यह विश्वविद्यालय करते थे। देश-देशांतरों की भाषाएं वहां पढ़ाई जाती थीं, जिनमें पारंगत होकर अपने को विश्व सेवा के लिए... आगे पढ़े

बद्ध होने का परिणाम

Updated on 29 December, 2020, 0:00
प्रकृति द्वारा बद्ध किए गए जीव कई प्रकार के होते है। कोई सुखी है और कोई अत्यंत कर्मठ है, तो दूसरा असहाय है। इस प्रकार के मनोभाव ही प्रकृति में जीव की बद्धावस्था के कारणस्वरूप हैं। भगवद्गीता के इस अध्याय में इसका वर्णन हुआ है कि वे किस प्रकार भिन्न-भिन्न... आगे पढ़े

 प्रोध पर काबू पाना सीखों

Updated on 28 December, 2020, 0:00
यदि आपको कोई कुत्ता कहता है तो आप उसे भौंकें नहीं बल्कि मुस्कुराएँ। गालियाँ देने वाला स्वयं ही शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा सचमुच कुत्ता बन जाओगे। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको गालियाँ देता है और आप... आगे पढ़े

ईश्वर के दर्शन

Updated on 27 December, 2020, 6:00
सरस्वती चंद्र तीर्थयात्रा पर जा रहे थे। लंबे और कठिन सफर को देखते हुए साथ में बर्तन, भोजन और जरूरत का अन्य सामान भी था। रास्ते में एक गांव पार करते हुए वह वहां के एक वीरान मंदिर में रुक गए। पहले तो सोचा कि यहां कोई नहीं होगा पर... आगे पढ़े

 मुक्ति की तलाश

Updated on 26 December, 2020, 6:00
जापान में नानहेन नामक एक परम ज्ञानी फकीर थे। एक दिन एक व्यक्ति उनके पास पहुंचकर बोला, 'मैं संन्यास लेना चाहता हूं। इसके लिए मैंने अपने घर-परिवार, रिश्ते-नाते सब को तिलांजलि दे दी है।' फकीर ने पूछा, 'क्या तुम बिल्कुल अकेले हो? तुम्हारे साथ वास्तव में कोई नहीं है।' व्यक्ति... आगे पढ़े

सब कुछ परमात्मा का है

Updated on 25 December, 2020, 6:45
महात्मा गांधी अपने समीप के धनिकों को 'बारम्बार ट्रस्टीशिप' का उपदेश देते थे। उनका तात्पर्य यह था कि सम्पत्ति का स्वामी अपने को मत मानो, बल्कि यह समझो कि ईश्वर ही सम्पत्ति का स्वामी है और तुम उसकी सुरक्षा और देख-रेख करने वाले ट्रस्टी हो। यह एक अमूल्य उपदेश है।... आगे पढ़े

ध्यान की तरंग 

Updated on 25 December, 2020, 6:00
यहूदियों में एक कथा है कि जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो देवता आते हैं और उस बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हैं; ताकि वह भूल जाए उस सुख को, जो सुख परमात्मा के घर उसने जाना था, नहीं तो जिंदगी बड़ी कठिन हो जाएगी-दयावश ऐसा करते हैं... आगे पढ़े

लिक्विड डाइट

Updated on 24 December, 2020, 19:21
सर्दी में वेजिटेबल सूप, जिंजर वॉटर और स्मूदीज से पानी की कमी पूरी करें, ये इम्युनिटी बढ़ाएंगे और थकान घटाएंगे दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी पीना जरूरी, बीच-बीच में नींबू पानी भी ले सकते हैं वेजिटेबल जूस और स्मूदीज पानी की कमी पूरी करते हैं, ये इम्युनिटी भी बढ़ाते हैं सर्दियों... आगे पढ़े

अपने अंदर रहना ही ध्यान

Updated on 23 December, 2020, 6:00
जब हम दुखी होते हैं तो लगता है समय बहुत लम्बा है। जब प्रसन्न होते हैं तो समय का अनुभव नहीं होता है। तो प्रसन्नता या आनन्द क्या है? यह हमारी स्वयं की आत्मा है। यही आत्मतत्व शिव तत्व है या शिव का सिद्धांत है। प्राय: हम जब भगवान की... आगे पढ़े

अहं भाव न पालें

Updated on 22 December, 2020, 6:00
एक बार देशभक्त वीर शिवाजी सज्जनगढ़ का किला बनवा रहे थे। हजारों मजदूर वहां काम करते थे। एक दिन शिवाजी किले को देखने गए। यत्र की तरह उनको काम करते देखकर शिवाजी के मन में अहं आ गया। वे सोचने लगे- इन सबकी आजीविका मेरे द्वारा चलती है! इतने में... आगे पढ़े

 ईमानदारी सर्वोत्तम

Updated on 20 December, 2020, 6:00
एक राजा ने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए राज्य के सभी नौजवानों को एक-एक बीज दिया और कहा, 'इसे गमले में लगाकर सींचना और एक वर्ष के पश्चात मेरे पास लेकर आना। जिसका पौधा सबसे अच्छा होगा, उसे राजा घोषित किया जाएगा।' सब बीज लेकर खुशी-खुशी लौटे।  पांच-छह दिन... आगे पढ़े

नदी और सागर

Updated on 19 December, 2020, 6:00
सुखदेव ऋषि के आश्रम में कई शिष्य रहते थे। उनमें अनुज नामक शिष्य काफी तेज था। धीरे-धीरे वह स्वयं को अन्य शिष्यों से श्रेष्ठ मानकर दूसरों को हीन समझने लगा। ऋषि उसके अंदर छिपे अहं को समझ गए और उसे एक दिन अपने साथ एक सागर के पास ले गए।... आगे पढ़े

उत्सव है बुद्धत्व 

Updated on 2 December, 2020, 6:00
बुद्धत्व मौलिक रूप से प्रांति है, विद्रोह है, बगावत है। काशी के पंडितों की सभा प्रमाणपत्र थोड़े ही देगी बुद्ध को! बुद्धपुरुष तुम्हें पोप की पदवियों पर नहीं मिलेंगे और न शंकराचायरें की पदवियों पर मिलेंगे। क्योंकि ये तो परंपराएं हैं। और परंपरा में जो आदमी सफल होता है, वह... आगे पढ़े

विनम्रता का पाठ 

Updated on 1 December, 2020, 6:00
पंडित विद्याभूषण बहुत बड़े विद्वान थे। दूर-दूर तक उनकी चर्चा होती थी। उनके पड़ोस में एक अशिक्षित व्यक्ति रहते थे-रामसेवक। वे अत्यंत सज्जन थे और लोगों की खूब मदद किया करते थे। पंडित जी रामसेवक को ज्यादा महत्व नहीं देते थे और उनसे दूर ही रहते थे। एक दिन पंडित... आगे पढ़े

 भावना भी समझें 

Updated on 26 November, 2020, 6:00
एक आदमी बस में रोजाना ही यात्रा करता था। वह बस में केले खाता और छिलके को खिड़की से फेंक देता। एक दिन एक भाई ने कहा, 'भाई! सड़क पर छिलके डालना उचित नहीं है। दूसरे फिसलकर गिर पड़ते हैं। छिलकों को एक ओर डालना चाहिए।' उसने कहा, 'अच्छी बात... आगे पढ़े

बद्धजीव का कर्मक्षेत्र

Updated on 24 November, 2020, 6:00
अर्जुन प्रकृति, पुरुष, क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ, ज्ञान तथा ज्ञेय के विषय में जानने का इच्छुक था। जब उसने इनके विषय में पूछा तो कृष्ण ने कहा कि यह शरीर क्षेत्र कहलाता है और इस शरीर को जानने वाला क्षेत्रज्ञ है। यह शरीर बद्धजीव के लिए कर्म-क्षेत्र है। बद्धजीव इस संसार में... आगे पढ़े

अहिंसा का स्वरूप 

Updated on 23 November, 2020, 6:45
सामान्यत: अहिंसा को निषेधार्थक माना जाता है। ‘न हिंसा -अहिंसा’- हिंसा का अभाव अहिंसा है, यह इसकी एकांगी परिभाषा है। इसको सर्वागीण रूप से परिभाषित करने के लिए इसके विधेयार्थ और निषेधार्थ दोनों को समझना जरूरी है। किसी प्राणी के प्राणों का वियोजन नहीं करना, इस सूत्र का हिंसा के... आगे पढ़े

सेवाभाव ही सर्वोपरि 

Updated on 21 November, 2020, 6:00
एकनाथ देवगढ़ राज्य के दीवान जनार्दन स्वामी के शिष्य। एक बार गुरू देव ने एकनाथ को राजदरबार का हिसाब करने को कहा। एकनाथ बहि-खाता लेकर हिसाब करने बैठ गये। दूसरे ही दिन सुबह हिसाब राजदरबार में देना था। सारा दिन हिसाब लिखने और करने में बीत गया। दिन में बैठे... आगे पढ़े

आहार का असर 

Updated on 18 November, 2020, 6:15
आदमी बीमार हो गया। रक्त चढ़ाने की जरूरत हुई। डॉक्टर रक्त चढ़ाता है, तो पहले वह ग्रुप मिलाता है। किस ग्रुप का रक्त है? ठीक मिलेगा या नहीं? सेठ को रक्त चढ़ाना था- एक कंजूस आदमी का रक्त ठीक मिला, चढ़ाया गया। सेठ को पता चला कि उसको कंजूस का... आगे पढ़े

 समता की अनुभूति 

Updated on 17 November, 2020, 6:00
मनोबल के विकास का दूसरा सूत्र बताया गया है- स्व दर्शन समता का दर्शन या परमात्मा का दर्शन। प्रांस की यूनिवर्सिटी का एक प्रोफेसर अहंकार में आकर बोला, 'मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  आदमी हूं।' किसी ने पूछ लिया-यह कैसे? उसने कहा, 'प्रांस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है। पेरिस प्रांस का... आगे पढ़े

सहन करना सीखें

Updated on 7 November, 2020, 6:00
व्यक्ति स्वयं ही बेचैनी का जीवन जीता है और अकारण ही जीवन में अनेक कष्टों को आमंत्रित कर लेता है। एक आदमी था। वह सदा प्रसन्न रहता था। एक दिन उसको उदास देखकर मित्र ने पूछा, मित्र! तुम सदा प्रसन्न रहते थे। तुम्हारी सारी अनुकूलताएं थीं। पर आज तुम बहुत... आगे पढ़े

 प्रार्थना की शक्ति का महत्व... 

Updated on 6 November, 2020, 6:00
मनुष्य का जीवन उसकी शारीरिक एवं प्राणिक सत्ता में नहीं, अपितु उसकी मानसिक एवं आध्यात्मिक सत्ता में भी आकांक्षाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और कामनाओं का है। जब उसे ज्ञान होता है कि एक महत्तर शक्ति संसार को संचालित कर रही है, तब वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति... आगे पढ़े

अपना बालाघाट


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