Monday, 16 May 2022, 11:20 AM | होम

जीवन मंत्र

जन्मतिथि से जानें कैसा बीतेगा आपका बुधवार का दिन

Updated on 26 April, 2022, 7:40
ज्योतिषशास्त्र की तरह अंक ज्योतिष से भी जातक के भविष्य, स्वभाव और व्यक्तित्व का पता लगता है। जिस तरह हर नाम के अनुसार राशि होती है उसी तरह हर नंबर के अनुसार अंक ज्योतिष में नंबर होते हैं। मूलांक 1- आज आपका दिन मिला जुला असर देने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र और... आगे पढ़े

सबसे अच्छा सखा है ज्ञान 

Updated on 21 April, 2022, 6:00
आत्मा ही आनन्द का स्वरूप है। किसी भी सुखद अनुभूति में तुम आंखे मूंद लेते हो। जैसे जब किसी फूल को सूंघते हो, कोई स्वादिष्ट खाना चखते हो या किसी वस्तु को स्पर्श करते हो। दुख का केवल यही अर्थ है कि तुम अपरिवर्तनशील आत्मा पर केन्द्रित होने के बदले... आगे पढ़े

सच्चे ज्ञानी की विशेषता

Updated on 8 April, 2022, 6:00
व्यक्ति सत्संगति से तीन वस्तुओं को-शरीर, शरीर का स्वामी या आत्मा तथा आत्मा के मित्र को- एक साथ संयुक्त देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। जब तक आध्यात्मिक विषयों के वास्तविक ज्ञाता को संगति नहीं होती, वे अज्ञानी हैं, वे केवल शरीर को देखते हैं, और जब यह शरीर विनष्ट... आगे पढ़े

इन तीन स्थितियों में व्यक्ति का जीवन अक्सर कष्टमय होता है

Updated on 19 March, 2022, 5:05
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के दूसरे अध्याय के आठवें श्लोक के जरिए तीन स्थितियों का वर्णन किया है | आचार्य ने इन तीनों स्थितियों को ही व्यक्ति के लिए काफी कष्टकारी बताया है | कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्, कष्टात्कष्टतरं चैव परगृहेनिवासनम् | इस श्लोक में... आगे पढ़े

दूसरों के सामने किसी अपने को छोटा मत पड़ने दें

Updated on 11 March, 2022, 7:00
बात द्वापर युग में उस समय की है, जब पांडव वनवास में थे। एक बार दुर्योधन को किसी शत्रु द्वारा बंदी बनाए जाने की खबर सुनकर युधिष्ठिर ङ्क्षचतित हो गए। उन्होंने भीम से कहा, ''हमें दुर्योधन की रक्षा करनी चाहिए।'' लेकिन भीम यह बात सुनकर नाराज हो गए। उन्होंने कहा, ''आप... आगे पढ़े

इसलिए रह जाती है पूर्व जन्म की स्मृतियां 

Updated on 11 March, 2022, 6:15
माना जाता है कि संसार में हम जो भी काम करते अथवा बोलते हैं वह एक उर्जा के रूप में प्रकृति में वर्तमान रहती है। उर्जा के विषय में विज्ञान कहता है कि उर्जा कभी नष्ट नहीं होती है। इसका स्वरूप बदलता रहता है। हमारी आत्मा भी उर्जा का ही... आगे पढ़े

तुम्हारी सम्पदा है निष्ठा  

Updated on 9 March, 2022, 11:32
यदि तुम सोचने हो कि ईश्वर में तुम्हारी निष्ठा ईश्वर का कुछ हित कर रही है, तो यह भूल है। ईश्वर या गुरु में तुम्हारी निष्ठा ईश्वर या गुरु का कुछ नहीं करती। निष्ठा तुम्हारी सम्पदा है। निष्ठा तुम्हें बल देती है। तुममें स्थिरता, केंद्रीयता, प्रशांति और प्रेम लाती है।... आगे पढ़े

नित अभ्यास से दर्शन कर सकते हैं ईश्वर का 

Updated on 9 March, 2022, 11:31
सभी शास्त्र  कहते हैं कि बिना भगवान को प्राप्त किये मुक्ति नहीं मिल सकती है। इसलिए भगवान की तलाश के लिए कोई व्यक्ति मंदिर जाता है तो कोई मस्जिद, कोई गुरूद्वारा, तो कोई गिरजाघर। लेकिन इन सभी स्थानों में जड़ स्वरूप भगवान होता है। अर्थात ऐसा भगवान होता है जिसमें... आगे पढ़े

सत्य की राह पर चलना क्यों जरूरी

Updated on 6 March, 2022, 6:45
एक बार काशी में भव्य सर्वधर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी भी उस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। उसमें भाग लेने के लिए देश के कोने-कोने से कई विद्वान और संत भी आए थे। सभी संतों ने गांधी जी का नाम सुन रखा था, अत: वे उनसे... आगे पढ़े

शिष्य बना प्रशंसा का पात्र

Updated on 6 March, 2022, 6:30
गंगा किनारे गुरु अभेंद्र का आश्रम था। एक बार देश में भीषण अकाल पड़ा। गुरु अभेंद्र ने संकटग्रस्तों की मदद के उद्देश्य से अपने तीन शिष्यों को बुलाकर कहा - ऐसे संकट के समय में हमें अकाल पीड़ितों की सेवा करनी चाहिए। तुम लोग अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर भूखों को... आगे पढ़े

सफलता चाहिए तो पहले ये सीखें

Updated on 4 March, 2022, 6:15
किसी भी काम में लगन का अपना महत्व होता है, सफलता आपकी एकाग्रता पर ही निर्भर करती है। आप संसार को पाने की दौड़ में हो या परमात्मा को, जब तक हम ध्यान लगाकर काम नहीं करेंगे कभी ठीक परिणाम नहीं मिलेगा। इसके लिए जरूरी है कि आप पहले अपने... आगे पढ़े

जैसा सोचेंगे वैसा ही फल मिलेगा

Updated on 23 January, 2022, 6:00
यदि आपका मन प्रसन्न नहीं है तो इसका जिम्मेदार कोई और नहीं है बल्कि आप स्वंय हैं। इसी प्रकार अगर आप सुखी है तो यह भी आपको अपने ही कारण प्राप्त हुआ है। ईश्वर का आपके सुख-दु: ख से कोई संबध नहीं है। ईश्वर तो मात्र कर्म का फल प्रदान... आगे पढ़े

समता की अनुभूति

Updated on 16 November, 2021, 6:15
मनोबल के विकास का दूसरा सूत्र बताया गया है- स्व दर्शन समता का दर्शन या परमात्मा का दर्शन। प्रांस की यूनिवर्सिटी का एक प्रोफेसर अहंकार में आकर बोला, 'मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  आदमी हूं।' किसी ने पूछ लिया-यह कैसे? उसने कहा, 'प्रांस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है। पेरिस प्रांस का... आगे पढ़े

चैतन्यता जरूरी

Updated on 15 November, 2021, 6:00
स्मृति और विस्मृति दोनों संतुलन अपेक्षित हैं। कुछेक व्यक्तियों में विस्मृति की बड़ी मात्रा होती है। वह हमारी चेतना की स्थिति को बहुत स्पष्ट करता है। एक व्यंग्य है। दो बहनें मिलीं। एक स्त्री ने कहा, मेरा पति बहुत भुलक्कड़ है। एक दिन बाजार में गया सब्जी लाने के लिए। ... आगे पढ़े

उपाय भी ठीक से हो

Updated on 14 November, 2021, 6:00
एक सास ने बहू से कहा, 'बहूरानी! मैं अभी बाहर जा रही हूं। एक बात का ध्यान रहे, घर में अंधेरा न घुसने पाए। बहू बहुत भोली थी। सास चली गई, सांझ होने को आई। उसने सोचा कि अंधेरा कहीं घुस न जाए, सारे दरवाजे बंद कर दिए। सब खिड़कियां... आगे पढ़े

दूसरों का हित करने में मिलता है सच्चा सुख

Updated on 13 November, 2021, 6:30
 शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ एक दयालु किसान था। वह सभी के काम आता था। उसकी दो लड़कियां थीं। उन्हें वह प्राणों से भी अधिक प्यार करता था। दोनों लड़कियां खेलती-कूदती बड़ी होने लगीं। जब वे विवाह योग्य हो गईं तो किसान ने बड़ी लड़की का विवाह... आगे पढ़े

विचारों की तरंगें

Updated on 9 November, 2021, 6:00
राजा की सवारी निकल रही थी। सर्वत्र जय-जयकार हो रही थी। सवारी बाजार के मध्य से गुजर रही थी। राजा की दृष्टि एक व्यापारी पर पड़ी। वह चन्दन का व्यापार करता था। राजा ने व्यापारी को देखा। मन में घृणा और ग्लानि उभर आई। उसने मन ही मन सोचा, 'यह... आगे पढ़े

अज्ञान का आवरण

Updated on 8 November, 2021, 6:00
गुरू के पास डंडा था। उस डंडे में विशेषता थी कि उसे जिधर घुमाओ, उधर उस व्यक्ति की सारी खामियां दिखने लग जाएं। गुरू ने शिष्य को डंडा दे दिया। कोई भी आता, शिष्य डंडा उधर कर देता। सब कुरूप-ही-कुरूप सामने दीखते। अब भीतर में कौन कुरूप नहीं है? हर... आगे पढ़े

प्रार्थना की शक्ति का महत्व...

Updated on 6 November, 2021, 6:45
मनुष्य का जीवन उसकी शारीरिक एवं प्राणिक सत्ता में नहीं, अपितु उसकी मानसिक एवं आध्यात्मिक सत्ता में भी आकांक्षाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और कामनाओं का है। जब उसे ज्ञान होता है कि एक महत्तर शक्ति संसार को संचालित कर रही है, तब वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति... आगे पढ़े

सफलता हासिल करने के लिए संघर्षों का सामना करना ही पड़ता है!

Updated on 3 November, 2021, 6:45
 शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ एक व्यक्ति ने तितली का एक लारवा देखा जो एक सुरक्षित खोल (प्यूपा) में बंद था। कुछ दिन बाद उसमें एक छोटा-सा छेद दिखा। व्यक्ति ने देखा कि एक तितली उस छोटे से छेद में से बाहर निकलने की कोशिश में जोर लगा... आगे पढ़े

विश्वास की ताकत

Updated on 2 November, 2021, 6:00
एक अंग्रेज अफसर अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ जहाज में सवार होकर सफर पर निकला। रास्ते में समुद्र में जोर का तूफान आया। मुसाफिर घबरा उठे। पर वह अंग्रेज अफसर जरा भी नहीं घबराया। उसकी पत्नी भी व्याकुल हो गई थी। उसने अपने पति से पूछा-इतना खतरनाक तूफान आया है।... आगे पढ़े

सुखी रहना है तो ईश्वर से शिकायत न करें

Updated on 29 October, 2021, 6:15
इंसानों की एक सामान्य आदत है कि तकलीफ में वह भगवान को याद करता है और शिकायत भी करता है कि यह दिन उसे क्यूं देखने पड़ रहे हैं। अपने बुरे दिन के लिए इंसान सबसे ज्यादा भगवान को कोसता है। जब भगवान को कोसने के बाद भी समस्या से... आगे पढ़े

जीवन का अर्थ बताती है अर्थी

Updated on 20 October, 2021, 6:15
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... आगे पढ़े

दान और परोपकार से घटता नहीं है धन

Updated on 19 October, 2021, 6:15
सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा... आगे पढ़े

दया करने वालों की जय-जयकार होती है

Updated on 18 October, 2021, 6:15
हर व्यक्ति अधिक से अधिक धन कमाने के पीछे व्यवहारिकता एवं मानवीय मूल्यों को भूलता जा रहा है। रास्ते में अगर कोई मजबूर व्यक्ति दिख जाए तो कोई बेबसी प्रकट करने के लिए दो पल रूक जाए यही बड़ी बात होती है। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी... आगे पढ़े

भक्त के भीतर रहते हैं कृष्ण

Updated on 17 October, 2021, 6:00
जब भगवान चैतन्य बनारस में हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन का प्रवर्तन कर रहे थे, तो हजारों लोग उनका अनुसरण कर रहे थे। तत्कालीन बनारस के अत्यंत प्रभावशाली और विद्वान प्रकाशानंद सरस्वती उनको भावुक कहकर उनका उपहास करते थे। कभी-कभी भक्तों की आलोचना दार्शनिक यह सोचकर करते हैं कि भक्तगण अंधकार... आगे पढ़े

द्वंद्व के बीच शांति की खोज

Updated on 15 October, 2021, 6:45
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।  जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... आगे पढ़े

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 10 October, 2021, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... आगे पढ़े

जीवन : परमात्मा का अनमोल उपहार

Updated on 9 October, 2021, 6:15
जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। यह स्वयं ही इतना दिव्य, पवित्र और परिपूर्ण है कि संसार का कोई भी अभाव इसकी पूर्णता को खंडित करने में असमर्थ है। आवश्यकता यह है कि हम अपने मन की गहराई से अध्ययन कर उसे उत्कृष्टता की दिशा में उन्मुख करें।  ईर्ष्या, द्वेष,... आगे पढ़े

क्या है शुद्ध अहिंसा!

Updated on 6 October, 2021, 6:00
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... आगे पढ़े

अपना बालाघाट


Powered By JSK Technosoft